Princes of Ayodhya and the Korean King

International story referring India

Hyphen

King Korea 2015

It all started with a dream. A princess in Ayodhya dreamt of a handsome king who wanted to marry her. Thousands of miles apart, across the sea, a king also had the same dream. The princess dared. Travelling a thousand miles from the holy city she reached the shore and set sail on a boat with her brother and a retinue of servants. She carried a potted plant of tea and a magic stone that could tame storms and help her weather rough sea. The journey was long. It took her three months to reach Gimhae( call it Kimhae, if you like, since in Korean there are no separate sounds for Ka, Kha, Ga and Gha) in Korea in AD 48. Princes Suri Ratna was 16 years old when she reached Gimhae in Korea.

King Kim Su-rohad already had a premonition about the arrival of the princess. He…

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लैटिन अमरीकी कविताएं (चिली)

अनोखी कविता चिली के कवीकी

Hyphen

अनुवादः राजेश कुमार झा

Jorge Teillier-Chile-Poet

जॉर्ज टेलियर (1935-1996)

जॉर्ज टेलियर को चिली के सर्वश्रेष्ठ कवियों में गिना जाता है। वे चिली के आधुनिक साहित्यिक परिदृश्य के स्तम्भ माने जाते हैं।
टेलियर अवसाद और स्मृति को उकेरने वाले कवि के रूप में जाने जाते हैं लेकिन आनंद के बारे में लिखी हुई उनकी कविताएं भी उतनी ही बेहतरीन मानी जाती है। टेलियर अपनी कविताओ के लिए ऊर्जा रोजमर्रा की चीजों से ग्रहण करते हैं। कविता के बारे में टेलियर का कहना है कि उसका सबसे महत्वपूर्ण पक्ष सौंदर्यगत नहीं होता। कविता मिथकों को रचती है। यह एक ऐसे काल और स्थान का सृजन करती है जो हमारी आम जिंदगी से पैदा होकर भी उससे परे होती है।
स्पैनिश भाषा में लिखी उनकी कविताओं का अनुवाद फ्रेंच, इटालियन, स्वीडिश और रोमानियन सहित कई भाषाओं में हो चुका है। उनकी दो कविताओं का हिंदी अनुवाद।

Apocalypse-Chile poem-3

 दुनिया का अंत

जिस दिन दुनिया का अंत होगा,

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नाच रही दुनियाँ सारी

कालगतीपर टिप्पणी करती यथार्थ कविता

सच्चिदानन्द सिन्हा

समयचक्र में नाच रही है, दुनियाँ की चीजें सारी ।

मैं ,मेरा का वहम पाल कर , रखा है सारा संसारी।।

तेरा,मेरा के इर्दगिर्द में ,भटक रही जगती सारी ।

चीजें तो सारी अनित्य फिर , क्यों करना मारा -मारी।।

विवेकशील सारे जीवों में , सबसे ज्यादा मेधा तेरी ।

कर्म रहेगा सर्वोत्तम तुम,ये सदा अपेक्षित है तेरी ।।

पर क्यों दलदल में डूब रहे ,क्या मारी गई मति तेरी?

क्यों विवेक से काम न लेते , कैसी ये कुमति घेरी ।।

समय तो कभी नहीं रूकता, द्रुतगति से चलता जाता।

जो कद्र नहीं करता इसका,जीवन भर वह पछताता ।।

करते जो सम्मान समय का, पाते भी उनसे सम्मान।

साधारण इन्सान से , एकदिन बनता बहुत महान ।।

जो अहम त्याग कर्तब्यनिष्ठ हो ,उचित देता सबको सम्मान।

वह मानव ,मानव से उपर उठ, बन जाता है देव समान।।

संत-तुल्य वही मानव को, समय दिलाता है सम्मान ।

साधारण मानव कर्मों…

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दर्द अपनाता है पराए कौन – जावेद अख़्तर

जावेद अख़्तरजावेद अख़्तर,हिंदी कविताएँ February 10, 2019 0 Minutes दर्द अपनाता है पराए कौनकौन सुनता है और सुनाए कौन कौन दोहराए वो पुरानी बातग़म अभी सोया है जगाए कौन वो जो अपने हैं क्या वो अपने हैंकौन दुख झेले आज़माए कौन अब सुकूँ है तो भूलने में हैलेकिन उस शख़्स को भुलाए कौन आज फिर दिल है… Continue reading दर्द अपनाता है पराए कौन – जावेद अख़्तर

इमारत

सुंदर कविता

Pratibimb

ती झाडे…..
उमललेली ,
नटलेली , सजलेली

ती झाडे……
चिमण्यांच्या चिवचिवत्या
गोकुळाने गजबजलेली

ती झाडे ……
तळपत्या उन्हालाही
सुखद गारव्याची झुळूक लेवून ,
तीवर मनमुक्त झुलणारी

ती झाडे …….
पानगळीनंतरच्या
प्रत्येक पालवीतून ,
जणू नवचैतन्य फुलवणारी

ती झाडे …….
पावसाच्या पहिल्या
आलिंगनाने तृप्त होऊन ,
हिरवाकंच शालू नेसलेल्या ,
नव्या नवरीसारखी मोहरणारी

ती झाडे ……
प्रत्येक नव्या
उमलत्या कळीसोबत स्वतःही
तितक्याच नवलाईने फुलणारी

ती झाडे ……..
रात्रीच्या अंधारातही
लक्ष लक्ष काजव्यांनी
उजळून निघणारी

ती झाडे …….
कधी कळ्या-फुला-फळांचा , कधी पक्षांचा ,
तर कधी बरसत्या मेघांचा ,
असे कितीतरी बहर सांभाळत
बहारदार आयुष्य जगणारी

आणि ही इमारत…..
या साऱ्या झाडांचा जीव घेऊन
इथे उभी…
अशीच …..! स्तब्ध , निश्चल ,
निर्जीव , निर्ढावलेली….!

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कवीने काय व्हावे ?

एक छान कविता

Pratibimb

कवीने काय व्हावे ?

मनातला पाऊस
कागदावर रिता करणारी शाई व्हावे
त्या शाईतून
मनात सरींची बरसात करणारे जादूगार व्हावे

दाटून आलेल्या ढगातून
लकाकणारी वीज व्हावे
करुणेच्या स्पर्शातून
मातीत उमलणारा कोंब व्हावे

दूर दूर पसरलेल्या अंधारात
लुकलुकणारे काजवे व्हावे
अदृष्टाच्या दृष्टीने
पाहिलेले ते एक स्वप्न व्हावे

जात-पात बंध तोडून सारे
फक्त ‘माणूस ‘व्हावे
मानवी मनाची स्पंदने
टिपणारी ‘ लेखणी ‘ व्हावे

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टिंचरी माई: अनपढ़ ‘गंवार’ महिला, जिसकी बात नेहरू को भी माननी पड़ी

उत्तराखंडके इक बेबाक महिला जिसकी नेहरूकोभी सुननी पडी.

छ‍िबड़ाट

महज 2 साल की उम्र में मां का आंचल छूट गया. 5 वर्ष की आयु में पिता का साया भी उठ गया. और सिर्फ 19 वर्ष की उम्र में उसका जीवनसाथी भी उसे छोड़कर इस दुनिया से चला गया. वो पैदा हुई थी दीपा देवी के तौर पर. हालात ने उसे इच्छागिरी माई बना दिया. लेक‍िन उसके साहस ने उसे ‘टिंचरी माई’ नाम दिया. और आज भी उत्तराखंड में वह इस नाम से जानी जाती हैं. याद की जाती हैं.

पति चला गया, तो सबने ठुकरायाः
पौड़ी के थलीसैंण ब्लॉक में मंज्यूर की टिंचरी माई को पहाड़ में शराब के ख‍िलाफ अभ‍ियान चलाए जाने के लिए जाना जाता है. इस निर्भीक औरत ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को भी अपनी मांग मनवाने के लिए मजबूर किया था. महज सात साल की उम्र में माई का विवाह गवांणी गांव के गणेश राम से हुआ. शादी के तुरंत बाद वह पति के…

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aurangabad: remnants of a despised emperor and his iranian queen

Different side of Aurangzeb

rama arya's blog

Aurangzeb. The very name evokes revulsion in Hindus and Sikhs alike throughout India. The butcher. Defacer of India’s rich Hindu cultural heritage. Murderer of Sikh Guru Tegh Bahadur. These are but a handful of epitaphs the country’s populace remembers Aurangzeb, India’s 6th Mughal emperor by.

His path to power was no less callous—he shed no tears when conniving the cold-blooded execution of his three brothers or when placing his old, frail father under house arrest.

It is 312 years since Shah Jahan’s fanatic son, Aurangzeb (1618 – 1707 AD) has died, but the hatred has not abated one iota. Stories of his cruelty fill school text-books. Nearly every major temple in India has either been mutilated or had a mosque built over it on his orders. The shudders are still there on the mention of his name. I have seen instances of all of these with my own eyes.

But…

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नमोगाथा ( हिंदीमे)

गहरा, घना अंधेरा सारा संसार जहां प्रकाश में नहा रहा है, वहीं भरतखंड कितने बरसोंतक घने अंधकार में खोया हुआ पडा था। कभी रामकृष्ण का यह देश हरे शापसे बिलकुल जम गया था। भगवान ने भी उस पर दया नहीं की, लेकिन एक दिन करुणा के उस समुद्र की आँखें इस पर आ गयी। उसका… Continue reading नमोगाथा ( हिंदीमे)