मराठी विनोद


हटके काहीतरी

ekoshapu

“मीबी गेलथो” हे कोणत्याही आफ्रिकन महिलेचे नाव नाही ,

हे तुम्हाला नगरला गेल्यावर कळेल !

😂😂

“उबाका बस्की” हे कुठल्याही रशियन माणसाचे नाव नाही,

हे तुम्हाला सांगलीत गेल्यावर कळेल !

😜😜

“शायना झालाकाबे” हे कुठल्या जर्मन बाईचे नाव नाही,

हे तुम्हाला नागपूरला गेल्यावर कळेल ! 😂🤔🤓

“अस्का कराईलीस” हे कुठल्याही ग्रीक माणसाचे नाव नाही,

हे तुम्हाला कोल्हापूरात गेल्यावर कळेल !

😜😜

“च्यापी फुकून” हे कुठल्याही जपानी मुलीचे नाव नाही,

हे तुम्हाला लातुरला गेल्यावर कळेल!

😝😝😝

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वो ढल रहा है – जावेद अख़्तर


जावेद अख्तर यांची नेहमीप्रमाणे विचार करायला लावणारी सुंदर कविता

Kayvashaala

वो ढल रहा है तो ये भी रंगत बदल रही है
ज़मीन सूरज की उँगलियों से फिसल रही है

जो मुझको ज़िंदा जला रहे हैं वो बेख़बर हैं
कि मेरी ज़ंजीर धीरे-धीरे पिघल रही है

मैं क़त्ल तो हो गया तुम्हारी गली में लेकिन
मिरे लहू से तुम्हारी दीवार गल रही है

न जलने पाते थे जिसके चूल्हे भी हर सवेरे
सुना है कल रात से वो बस्ती भी जल रही है

मैं जानता हूँ की ख़ामशी[1] में ही मस्लहत[2] है
मगर यही मस्लहत मिरे दिल को खल रही है

कभी तो इंसान ज़िंदगी की करेगा इज़्ज़त
ये एक उम्मीद आज भी दिल में पल रही है

                               – जावेद अख़्तर

जावेद अख़्तर जी की अन्य प्रसिध रचनायें 

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लाई फिर इक लग़्ज़िशे-मस्ताना तेरे शहर में – कैफ़ि आज़मी


कैफ़ि आज़मीउर्दू शायरी,कैफ़ि आज़मी April 26, 2019 0 Minutes लाई फिर इक लग़्ज़िशे-मस्ताना तेरे शहर में ।फिर बनेंगी मस्जिदें मयख़ाना तेरे शहर में । आज फिर टूटेंगी तेरे घर की नाज़ुक खिड़कियाँआज फिर देखा गया दीवाना तेरे शहर में । जुर्म है तेरी गली से सर झुकाकर लौटनाकुफ़्र है पथराव से घबराना तेरे शहर में । शाहनामे लिक्खे हैं खंडरात… Continue reading लाई फिर इक लग़्ज़िशे-मस्ताना तेरे शहर में – कैफ़ि आज़मी

बेघर – जावेद अख़्तर


15h ago जावेद अख़्तरहिंदीहिंदी कविताहिंदी साहित्य शाम होने को हैलाल सूरज समंदर में खोने को हैऔर उसके परेकुछ परिन्‍देक़तारें बनाएउन्‍हीं जंगलों को चलेजिनके पेड़ों की शाख़ों पे हैं घोंसलेये परिन्‍देवहीं लौट कर जाएँगेऔर सो जाएँगेहम ही हैरान हैंइस मकानों के जंगल मेंअपना कहीं भी ठिकाना नहींशाम होने को हैहम कहाँ जाएँगे        … Continue reading बेघर – जावेद अख़्तर

Princes of Ayodhya and the Korean King


International story referring India

Hyphen

King Korea 2015

It all started with a dream. A princess in Ayodhya dreamt of a handsome king who wanted to marry her. Thousands of miles apart, across the sea, a king also had the same dream. The princess dared. Travelling a thousand miles from the holy city she reached the shore and set sail on a boat with her brother and a retinue of servants. She carried a potted plant of tea and a magic stone that could tame storms and help her weather rough sea. The journey was long. It took her three months to reach Gimhae( call it Kimhae, if you like, since in Korean there are no separate sounds for Ka, Kha, Ga and Gha) in Korea in AD 48. Princes Suri Ratna was 16 years old when she reached Gimhae in Korea.

King Kim Su-rohad already had a premonition about the arrival of the princess. He…

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लैटिन अमरीकी कविताएं (चिली)


अनोखी कविता चिली के कवीकी

Hyphen

अनुवादः राजेश कुमार झा

Jorge Teillier-Chile-Poet

जॉर्ज टेलियर (1935-1996)

जॉर्ज टेलियर को चिली के सर्वश्रेष्ठ कवियों में गिना जाता है। वे चिली के आधुनिक साहित्यिक परिदृश्य के स्तम्भ माने जाते हैं।
टेलियर अवसाद और स्मृति को उकेरने वाले कवि के रूप में जाने जाते हैं लेकिन आनंद के बारे में लिखी हुई उनकी कविताएं भी उतनी ही बेहतरीन मानी जाती है। टेलियर अपनी कविताओ के लिए ऊर्जा रोजमर्रा की चीजों से ग्रहण करते हैं। कविता के बारे में टेलियर का कहना है कि उसका सबसे महत्वपूर्ण पक्ष सौंदर्यगत नहीं होता। कविता मिथकों को रचती है। यह एक ऐसे काल और स्थान का सृजन करती है जो हमारी आम जिंदगी से पैदा होकर भी उससे परे होती है।
स्पैनिश भाषा में लिखी उनकी कविताओं का अनुवाद फ्रेंच, इटालियन, स्वीडिश और रोमानियन सहित कई भाषाओं में हो चुका है। उनकी दो कविताओं का हिंदी अनुवाद।

Apocalypse-Chile poem-3

 दुनिया का अंत

जिस दिन दुनिया का अंत होगा,

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नाच रही दुनियाँ सारी


कालगतीपर टिप्पणी करती यथार्थ कविता

सच्चिदानन्द सिन्हा

समयचक्र में नाच रही है, दुनियाँ की चीजें सारी ।

मैं ,मेरा का वहम पाल कर , रखा है सारा संसारी।।

तेरा,मेरा के इर्दगिर्द में ,भटक रही जगती सारी ।

चीजें तो सारी अनित्य फिर , क्यों करना मारा -मारी।।

विवेकशील सारे जीवों में , सबसे ज्यादा मेधा तेरी ।

कर्म रहेगा सर्वोत्तम तुम,ये सदा अपेक्षित है तेरी ।।

पर क्यों दलदल में डूब रहे ,क्या मारी गई मति तेरी?

क्यों विवेक से काम न लेते , कैसी ये कुमति घेरी ।।

समय तो कभी नहीं रूकता, द्रुतगति से चलता जाता।

जो कद्र नहीं करता इसका,जीवन भर वह पछताता ।।

करते जो सम्मान समय का, पाते भी उनसे सम्मान।

साधारण इन्सान से , एकदिन बनता बहुत महान ।।

जो अहम त्याग कर्तब्यनिष्ठ हो ,उचित देता सबको सम्मान।

वह मानव ,मानव से उपर उठ, बन जाता है देव समान।।

संत-तुल्य वही मानव को, समय दिलाता है सम्मान ।

साधारण मानव कर्मों…

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दर्द अपनाता है पराए कौन – जावेद अख़्तर


जावेद अख़्तरजावेद अख़्तर,हिंदी कविताएँ February 10, 2019 0 Minutes दर्द अपनाता है पराए कौनकौन सुनता है और सुनाए कौन कौन दोहराए वो पुरानी बातग़म अभी सोया है जगाए कौन वो जो अपने हैं क्या वो अपने हैंकौन दुख झेले आज़माए कौन अब सुकूँ है तो भूलने में हैलेकिन उस शख़्स को भुलाए कौन आज फिर दिल है… Continue reading दर्द अपनाता है पराए कौन – जावेद अख़्तर