मैं अब भी सफर करती हूँ… 

आज के महिला दिन को समर्पित प्रतिभा गुप्ता की ये कविता ....... फिरसे शेअर कर रहा हुं. मैं डरती हूँ, घबराती हूँ, तुम्हारे इस बदलते जमाने से। मैं सम्भलती हूँ, अकड़ दिखाती हूँ, तुम्हारे इसी बदलते जमाने से। मैं हूँ आज की, पर हूँ पुरानी सी, मैं रूह हूँ आवाज़ की, पर हूँ कहानी सी।… Continue reading मैं अब भी सफर करती हूँ… 

हर एक आशिफाके लिए

आशिफा, एक नाम जो आज हर जुबान पे है, एक बिलकुल भोली सी मासूम सी बच्ची की तस्वीर हर जगह है, और साथ में है रटे रटाये शब्द और बस मोमबतिया। हा मोमबतिया ही है बस, बहुत दुःखी से चेहरे बना कर लोग उस भोली तस्वीर के आगे बस मोमबत्ती जला देते है। क्या जो… via… Continue reading हर एक आशिफाके लिए

Boyfriend

कैसी अजीब लड़की है ये, ऐसा पॉसिबल ही नहीं है । पक्का झूठ बोल रही होगी ये , ऐसा कैसे हो सकता है कि जॉब करते हुए इतने साल हो गए फिर भी आज तक कोई बॉयफ्रेंड नहीं बना । कितनी छोटी सोच की लड़की है ये । बॉयफ्रेंड , कितने ही डेफिनेशन है इस… via… Continue reading Boyfriend