!! नैनों से नयन दो-चार हुए !!

Hindi Kavya

नैनों से नयन दो-चार हुए,
दिल से दिल का तकरार हुआ,
कुछ उसने कहा; कुछ मैंने कहा,
इशारों ही इशारों में बात हुई,
इज़हार-ए-मुहब्बत ऐसी हुई,
महफ़िल सारा बीमार हुआ।
नैनों से नयन दो-चार हुए।।

बिन पंख उड़ूँ मैं हवाओं में,
बिन गीत के मैं सरगम गाऊँ,
बिन बात ठिठोली मैं खेलूँ,
बिन संग चलूँ मैं राहों के,
उसने जो छुआ मन को; मन से,
महफ़िल का भी शृंगार हुआ।
नैनों से नयन दो-चार हुए।।

फूलों से कहूँ; शृंगार तूं कर,
भवरों से लिपटकर प्यार तूं कर,
नदियों से कहूँ; इठलाकर चल,
आने वाली है बयार निर्झर,
उसने जो छुआ गीत होठों से,
महफ़िल का मन गुलज़ार हुआ।
नैनों से नयन दो-चार हुए।।

कुछ बयाँ हुई; कुछ अनकही रही,
कुछ बातों के सफ़र में रात गई,
उस मौसम के शहर में हुआ संगम,
सपनों के सृजन का आगाज़ हुआ,
उसने जो छुआ तन को; तन से,
महफ़िल खुद संगीत का…

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