आपकी याद आती रही रात-भर – फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’

फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’उर्दू शायरी,फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’ 

“आपकी याद आती रही रात-भर”
चाँदनी दिल दुखाती रही रात-भर

गाह जलती हुई, गाह बुझती हुई
शम-ए-ग़म झिलमिलाती रही रात-भर

कोई ख़ुशबू बदलती रही पैरहन
कोई तस्वीर गाती रही रात-भर

फिर सबा सायः-ए-शाख़े-गुल के तले
कोई क़िस्सा सुनाती रही रात-भर

जो न आया उसे कोई ज़ंजीरे-दर
हर सदा पर बुलाती रही रात-भर

एक उमीद से दिल बहलता रहा
इक तमन्ना सताती रही रात-भर

– फ़ैज़ अहमद ‘फ़ैज़’

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